“बुलडोजर राज नहीं चलेगा”, “लोकतंत्र पर हमला बंद करो”, “रोजगार और शिक्षा हमारा अधिकार”
दरभंगा: भाकपा–माले के 12वें बिहार राज्य सम्मेलन की शुरुआत जनआंदोलनों, सामाजिक न्याय और प्रगतिशील सांस्कृतिक परंपराओं के महान प्रतीकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई।
दरभंगा: भाकपा–माले के 12वें बिहार राज्य सम्मेलन की शुरुआत जनआंदोलनों, सामाजिक न्याय और प्रगतिशील सांस्कृतिक परंपराओं के महान प्रतीकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। बाबा नागार्जुन, डॉ. भीमराव आंबेडकर, चंद्रशेखर आज़ाद, महात्मा गांधी, डॉ. राममनोहर लोहिया सहित अनेक जननायकों और सांस्कृतिक हस्तियों को याद करते हुए नेताओं और प्रतिनिधियों ने उनके संघर्षों से प्रेरणा लेने का संकल्प दोहराया.
इस अवसर पर भाकपा–माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, काराकाट सांसद राजाराम सिंह, मीना तिवारी, धीरेंद्र झा, अमर, शशि यादव सहित पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए. नेताओं ने कहा कि बिहार की धरती सामाजिक बदलाव, जनप्रतिरोध और लोकतांत्रिक आंदोलनों की समृद्ध परंपरा की वाहक रही है और यह सम्मेलन उसी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प है.
लहेरियासराय चौक से सम्मेलन स्थल स्थित प्रेक्षागृह तक एक विशाल और उत्साहपूर्ण मार्च निकाला गया. लाल झंडों, जनगीतों और नारों से गूंजते इस मार्च में बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लिया. “बुलडोजर राज नहीं चलेगा”, “लोकतंत्र पर हमला बंद करो”, “रोजगार और शिक्षा हमारा अधिकार” जैसे नारों के साथ निकला यह मार्च सम्मेलन के राजनीतिक संदेश को भी स्पष्ट रूप से सामने रख रहा था.
सम्मेलन स्थल पहुंचने पर शहीद वेदी पर पार्टी और जनआंदोलनों के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई. दो मिनट का मौन रखकर उनके संघर्षों और बलिदानों को याद किया गया. नेताओं ने कहा कि शहीदों के सपनों का बिहार बनाने की लड़ाई को और मजबूत किया जाएगा.
सम्मेलन परिसर को जनसंघर्षों और प्रगतिशील सांस्कृतिक चेतना की पहचान के रूप में सजाया गया है. सम्मेलन नगर का नामकरण प्रख्यात कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु और जनकवि बाबा नागार्जुन के नाम पर किया गया है, जो बिहार की जनपक्षधर साहित्यिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं. पंडाल को का. राजाराम, रामदेव वर्मा और लक्ष्मी पासवान की स्मृति को समर्पित किया गया है, जबकि मंच का नामकरण मधु मिश्रा, दयमंती सिन्हा और शहिदा खातून के नाम पर किया गया है.
इसके अलावा सम्मेलन स्थल पर पार्टी के वरिष्ठ एवं दिवंगत नेताओं — विशेश्वर यादव, मनोज यादव, इमानुएल हक, विष्णुदेव यादव सहित अन्य दिवंगत नेताओं— की स्मृति में प्रवेश द्वार बनाए गए हैं. पूरे परिसर को लाल झंडों, पोस्टरों, बैनरों और जनसंघर्षों की तस्वीरों से सजाया गया है. बुलडोजर राज, सांप्रदायिकता, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमलों के खिलाफ संघर्ष का संदेश देने वाले पोस्टर सम्मेलन की विशेष आकर्षण बने हुए हैं.
सम्मेलन में वैज्ञानिक सोच और तार्किक चेतना के सवाल को भी प्रमुखता से उठाया गया. पाखंड, अंधविश्वास और सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ वैचारिक संघर्ष को नई दिशा देने वाले प्रख्यात इतिहासकार रामशरण शर्मा, डी.एन. झा और राधाकृष्ण चौधरी को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया. पटना से एनबीसी 24 के लिए कुमार गौतम की रिपोर्ट।
Divya Singh